शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

ye mulaqat ek bahana hai-film khandaan

गुरुवार, 29 जुलाई 2010

The Manganiyar Seduction

Hey Nand Nand Gopala - 2

बुधवार, 28 जुलाई 2010

बारमेर न्यूज़ ट्रैक kaajal



म्हनै रमतां ने काजल टकी लाधी ऐ मांकोरो काजलियो
पूरे राजस्थानी में जनजीवन में काजल को विशेष महत्व है। यह यहाँ के लोगों की दैनिक श्रृंगार का हिस्सा है। इसे अंजण, कज्जल, दीय- सुत, नैनसनेह, पाटणमुखी, मोहणगती आदि कई नामों से भी जाना जाता है। जिस दीये से गृहणियां काजल बनाती हैं, उसे "काजलकर' कहा जाता है। साथ- साथ अपने आप में एक बहुत बड़ा सांकेतिक अर्थ भी रखना है। राजस्थानी लोक गीतों में भी काजल की कई बार चर्चा आ जाती है :-
काली काली काजरिया री रेखज्यूं भूरोड़े भाख्र में चमके बीजली
ढ़ोले री मूभल हाले तो ले चालू मुरधर देश, कोई विरहिगी अपने प्रियतम को गीत के माध्यम से समझाती है कि किस स्थिति में काजल सुखदायी होता है :-
काजल भरियो कूंपालो जी कोई पड़यो पिलंग अध बीचउनाला री रुत बुरी, थांनै खेलत गरभी होम कोरो काजलियोचौमासा री रुत बुरी, खेलत रल गावे काजरियोकाजरियो मत सार चौमासे - कोरो का जलियोनैणों नें समायो रे सियाला री रात का जलियो थांने आणन्द छाय- कोरो काजलियो
नायिका जब अपने प्रेमी से रुठ जाती है, तो बिना कुछ बोले अपने व्यथा का प्रदर्शन अपने काजलभरे नयनों से कर देती है :-
ना वे गावै ना हँसै, मुख बोले बोल।नैणां काजल ना दियो, ना गल पऋयों हार।।
एक नवविवाहिता, जो घूंघट की ओट से तिरछी नजरों से देखती हैं, के लिए एक कवि ने लिखा है:-
बेसर बणी मांग सिर ऊपर, मोत्यां बिंदी झलकै।काजल रेख नैणां में, घूंघट मच्छियां पलकै।।
मारवाड़ क्षेत्र में घर- घर में "घूमर' गीत गाया जाता है। जसोल वाले भटियाणी जी का एक घूमर इस प्रकार है :-
म्हनै रमतां ने काजल टोकी लाधी ऐ मांम्हारी घूमर है नखराली है ऐ मांम्हनै राठौड़ा रै घर भल दीजो ऐ मांम्हनै राठौड़ां रो पेय प्यारो लागे ऐ मां
भक्त कवयित्री मीरां ने काजल के संदर्भ में कहा है :-
गैणा गांठा राणा हम सब त्याग्या,लाग्यो कर रो चूड़ो।काजल टीकी हम सब त्याग्या,त्याग्यो बांधणा जूड़ो।।
इसका तात्पर्य यह है कि मीरा ने कृष्ण विरह में सारे सांसारिक श्रृंगारों का त्याग कर दिया है। काजल इसलिए त्यागा कि श्री कृष्ण का श्याम- सलोना रुप नयनों में रच- बस गया है।वैसे तो काजल सौभाग्यवती स्रियों का श्रृंगार है, परंतु इतिहास गवाह है कि कई बार मृत पति के शव के पास बैठकर यहाँ की वीरांगनाओं ने एक प्रतिज्ञा के ओज के साथ काजल की रेख का अंजन किया। सती का श्रृंगार भी काजल के बिना अधुरा माना जाता था।काजल के साथ-साथ काजलिया रंग भी महत्वपूर्ण है। मारवाड़ क्षेत्र में "काजली तीज' सुहागिनों का त्योहार है। इस दिन सुहागिन स्रियाँ व्रत - उपवास रखती है और सुहाग के प्रतीक के रुप में कागज, टीकी, चूड़ियाँ, मेंहदी और मजीठ आदि का दान करती है। काजल के बिना कई धार्मिक व सामाजिक कृत्य अधूरे माने जाते हैं।

The Manganiyar Seduction

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

Songs from Rajasthan - Kesariya Balam

सोमवार, 26 जुलाई 2010

hey kanchan

Gopal Bina Mori Kaun Khabar Le

शनिवार, 24 जुलाई 2010

Sawan Ke Suhane Mausam Mein - Pankaj Udhas

गुरुवार, 22 जुलाई 2010

barmer news track

Googleउनकी हर बात दिल लुभाती है ,
हर अदा, हर खता भी बहती है .
दिल मैं मेरे ख़याल आए तो,
बात उनकी ज़ुबान पे आती है.
सब मेरे हाल पर परेशान है.न
एक वह हैं की मुस्कुराती है.न.
गीत मेरा लिखा ही है शायद,
वह जो हौले से गुन गुनाती है.न
हाथ दीवाने के दे अल्लाह कुछ ऐसी कलम,
आस्मान पर लीख के जाऊं है उन्ही से प्यार है!
ख़ास लिखा है ख़त मैं, ज़रा आहिस्ता बोलियेगा
भेज रहा हूँ दिल अपना, ज़रा आहिस्ता खोलियेगा
तू इस तरह से मेरे दिल मैं शामिल है
जहाँ भी जाऊं लगता है तेरी महफ़िल है
रस्ते मैं गीरे हैं फूल, उठता है कोई कोई
मुहब्बत करते हैं सभी, निभाता है कोई कोई
ज़िंदगी एक फूल है और मोहब्बत उस का शेहेद
प्यार एक दरिया है , और मेहमूब उसकी सरहद
जुखा कर उठा न सके सर मेरे सवाल पर,
जुल्फों का नकाब गिरा है , मेरे दिल का राज़ ले कर

KISHORE KUMAR & USHA MANGESHKAR SING ON A RAINY DAY CHATTRI NA KHOL ...

बुधवार, 21 जुलाई 2010

Yeh khidki Jo Band Rehti Hai - Rafi.flv

Kuchhe Dhaage : Hai Hai Ek Ladka Mujhko Khat

मंगलवार, 20 जुलाई 2010

Rafi - Teri Galiyon Mein - Hawas [1974]

सोमवार, 19 जुलाई 2010

शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

सोमवार, 12 जुलाई 2010

Choom Kar Madh Bhari - Pankaj Udhas.flv

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

Rajasthani folk music are the uncrowned Ssfi Fakir




Rajasthani folk music are the uncrowned Ssfi Fakir



Pakistan's popular folk and Sufi singer Mohammed Fakir Ssfi originally resident of Barmer district. Mystic India in 1965 the family had moved to Sindh in Pakistan. Area saint's father - known folk singer was. Thar's folk songs and music in Pakistan, he waved the flag. Inherited from his father, folk song - Music Treasures of the saint taken seriously. Into the mystic folk songs sing in unsurpassed style. The hugely popular in Pakistan was like a mystic Ssfi Shufiyana. Ssfi wonderful musical like a saint because soon found international stage. Dhoom Antararashtyy forums Ssfi saint was created. Ssfi of mystic folk songs are so juicy and Harmonic are the same, do not answer them in musical devotion. Shufiyana guess when mystic Amir Khusrau, Shah Baba Religion, Madho Shah Hussain, Sultan Bahu, Khwaja Ghulam Farid's compositions sing, the audience go crazy. Many mystic Hshaoan Sindhi, Marwari, Ssiraqui, Punjabi, Urdu and East when its different like a singing, the audience are immersed in their musical juices. Born in 1961 in the district of Barmer Thar region Ssfi Maangniyar traditional folk musical saint from his father and learned Commaycha recital. He later sarangi player Ustad Majid Khan, who at the time of the famous singer and sarangi player Pak radio was the folk song - music niceties learned and perfected the instrument in recital. While the niceties of musical Shufi Ustad Salamat Ali Khan Sahib in the evening with family learned 84. Ssfi Meera, Kabir, Tulsidas, Abdul Latif Hitai, mobile Sarmaast, Shah Baba Religion sing devotional compositions very seriously. Ssfi Maangniyar children folk songs - traditional folk song by music training - are building on the tradition of music. Mystic India several times through its programs have spread Shufi and devotional musical tone.